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ICSE Class 10 Hindi (Ekanki Sanchay) • Chapter Notes
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बहू की विदा (Bahu Ki Vida)

bahu ki vida
एकांकी परिचय

लेखक: विनोद रस्तोगी
मूल विषय: दहेज प्रथा रूपी सामाजिक बुराई और समाज का दोहरा मापदंड (Double Standards)।
पात्र परिचय:

एकांकी का विस्तृत सार (Summary)

1. प्रमोद का अपनी बहन को विदा कराने आना

एकांकी की शुरुआत में प्रमोद अपनी बहन कमला को उसके पहले 'सावन' के अवसर पर मायके ले जाने के लिए उसके ससुराल (जीवनलाल के घर) आता है। भारतीय परंपरा के अनुसार विवाह के बाद पहले सावन में बेटी का मायके जाना शुभ माना जाता है। परंतु कमला का ससुर, जीवनलाल, अत्यंत लालची और अहंकारी है। वह प्रमोद से साफ कह देता है कि जब तक शादी में तय किए गए दहेज के पाँच हज़ार रुपये (₹5000) पूरे नहीं दिए जाएँगे, तब तक वह अपनी बहू की विदा नहीं करेगा।

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2. प्रमोद की बेबसी और राजेश्वरी की सहानुभूति

प्रमोद जीवनलाल के बहुत हाथ-पैर जोड़ता है और कहता है कि वह एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति है। उसने अपनी बहन की शादी में अपनी हैसियत से बढ़कर खर्च किया है और अब उसके पास पाँच हज़ार रुपये नहीं हैं। लेकिन जीवनलाल उसकी एक नहीं सुनता और उसका घोर अपमान करता है। जब जीवनलाल कमरे से चला जाता है, तब उसकी पत्नी राजेश्वरी वहाँ आती है। राजेश्वरी एक समझदार और सहृदय महिला है। वह अपने पति के लालची व्यवहार से दुखी है। वह प्रमोद को दिलासा देती है और उसे पाँच हज़ार रुपये (अपनी चाबियों का गुच्छा देकर) देने का प्रयास करती है ताकि वह उन रुपयों को जीवनलाल के मुँह पर मारकर अपनी बहन को ले जा सके। परंतु प्रमोद एक स्वाभिमानी युवक है, वह राजेश्वरी के पैसे लेने से मना कर देता है और निश्चय करता है कि वह अपना घर बेचकर पैसे लाएगा।

3. समाज का दोहरा मापदंड (Double Standards)

इसी बीच, जीवनलाल बहुत खुश होता है क्योंकि उसका बेटा रमेश अपनी बहन गौरी (जीवनलाल की बेटी) को उसके ससुराल से विदा कराकर लाने गया है। जीवनलाल को अपनी बेटी से बहुत प्यार है। लेकिन कहानी में मोड़ (Climax) तब आता है जब रमेश घर लौटता है और उसके साथ गौरी नहीं होती। रमेश बताता है कि गौरी के ससुराल वालों ने उसे विदा करने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा है कि जब तक जीवनलाल गौरी की शादी में कम दिया गया दहेज पूरा नहीं करेगा, तब तक वे गौरी को विदा नहीं करेंगे।

4. जीवनलाल का हृदय परिवर्तन

यह सुनकर जीवनलाल के पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है। उसे समझ नहीं आता कि उसके साथ ऐसा कैसे हो गया। तब उसकी पत्नी राजेश्वरी उसे आईना दिखाती है। वह जीवनलाल को समझाती है कि "बेटियाँ तो सबकी एक सी होती हैं... जब हम किसी की बेटी को दहेज के लिए रुला सकते हैं, तो हमारी बेटी को भी कोई रुला सकता है।" राजेश्वरी जीवनलाल को अहसास कराती है कि वह अपनी बहू (कमला) के लिए कसाई बन रहा था, और अब गौरी के ससुर भी गौरी के लिए वैसे ही कसाई बन गए हैं। इस घटना से जीवनलाल की आँखें खुल जाती हैं। उसका अहंकार टूट जाता है। वह अपनी गलती स्वीकार करता है और बिना किसी दहेज की माँग के अपनी बहू कमला को खुशी-खुशी उसके भाई प्रमोद के साथ विदा कर देता है।

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एकांकी का उद्देश्य / संदेश

इस एकांकी के माध्यम से लेखक विनोद रस्तोगी ने भारतीय समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी 'दहेज प्रथा' जैसी भयंकर कुरीति पर करारा व्यंग्य किया है। एकांकी यह संदेश देती है कि समाज में 'बेटी और बहू' के बीच दोहरा मापदंड (भेदभाव) नहीं होना चाहिए। जो लोग अपनी बहू को दहेज के लिए प्रताड़ित करते हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी अपनी बेटी भी किसी के घर की बहू है। जिस प्रकार हमें अपनी बेटी का दुख और अपमान सहन नहीं होता, उसी प्रकार हमें किसी दूसरे की बेटी (अपनी बहू) का भी अपमान नहीं करना चाहिए। लालच और अहंकार मनुष्य की इंसानियत को खत्म कर देते हैं।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs)

प्रश्न 1 जीवनलाल ने प्रमोद से अपनी बहू की विदा करने के लिए क्या शर्त रखी थी?
उत्तर: जीवनलाल एक अत्यंत लालची व्यक्ति था। जब प्रमोद अपनी बहन कमला को पहले सावन पर विदा कराने आया, तो जीवनलाल ने शर्त रखी कि जब तक प्रमोद शादी में तय किए गए दहेज के बचे हुए पाँच हज़ार रुपये (₹5000) नकद लाकर नहीं देगा, तब तक वह कमला की विदा नहीं करेगा।
प्रश्न 2 राजेश्वरी का चरित्र-चित्रण कीजिए। उसने प्रमोद की सहायता किस प्रकार करनी चाही?
उत्तर: राजेश्वरी जीवनलाल की पत्नी है, परंतु वह अपने पति के बिल्कुल विपरीत स्वभाव की है। वह एक ममतामयी, समझदार, निडर और न्यायप्रिय महिला है। वह बहू और बेटी में कोई भेदभाव नहीं करती। जब जीवनलाल ने दहेज के लिए प्रमोद का अपमान किया, तो राजेश्वरी ने प्रमोद को सांत्वना दी और उसे अपनी तिजोरी की चाबी देकर पाँच हज़ार रुपये निकालने को कहा, ताकि प्रमोद उन रुपयों को जीवनलाल को देकर अपनी बहन को विदा करा सके। यह उसकी इंसानियत और कमला के प्रति ममता को दर्शाता है।
प्रश्न 3 एकांकी के अंत में जीवनलाल का हृदय परिवर्तन किस प्रकार होता है?
उत्तर: जीवनलाल को अपनी बेटी गौरी पर बहुत घमंड था और वह सोचता था कि उसने गौरी की शादी में खूब दहेज दिया है। परंतु जब उसका बेटा रमेश गौरी को विदा कराने जाता है, तो गौरी के ससुराल वाले भी कम दहेज का ताना मारकर गौरी को विदा करने से मना कर देते हैं। यह घटना जीवनलाल के लिए एक करारा तमाचा थी। राजेश्वरी उसे समझाती है कि जो व्यवहार वह अपनी बहू कमला (किसी की बेटी) के साथ कर रहा था, वही व्यवहार गौरी के ससुर ने उसकी बेटी के साथ किया है। इससे जीवनलाल का घमंड टूट जाता है, उसे अपनी गलती का अहसास होता है और उसका हृदय परिवर्तित हो जाता है।